गुरुवार, 24 जनवरी 2013

प्रवक्ताओं की ये 'महिला ब्रिगेड'


चंदा बारगल/ धूप-छांव/ राजनीतिक दलों के लिए अब प्रवक्ता पद अब महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सत्तारूढ़ दल कांग्रेस और भाजपा-दोनों ही प्रमुख दलों ने विभिन्न मुद्दों और पार्टी की नीतियों पर विचार रखने, प्रतिक्रिया देने के लिए बड़ी गंभीरता से प्रवक्ताओं का चयन किया है। बढ़िया प्रवक्ता बनने के लिए आकर्षक दिखावा, भाषा, उम्दा वक्तृत्व शैली और हाजिरजवाब होना जरूरी है।

कांग्रेस के पास आला दर्जे के मनीष तिवारी और वाक् पटु रेणुका चौधरी हैं तो भाजपा के पास निर्मला सीतारमण हैं। कांग्रेस के पास राशिद अल्वी और जनार्दन द्विवेदी हैं तो भाजपा के पास शाहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी हैं और प्रकाश जावड़ेकर हैं। कांग्रेस की तुलना में भाजपा के पास नई नवेली महिला प्रवक्ताओं का 'वूमन पावर' उल्लेखनीय है। भाजपा में बढ़ रही इन महिला प्रवक्ताओं की लोकप्रियता के कारण शहनवाज हुसैन, राजीव प्रताप रूढ़ी और मुख्तार अब्बास नकवी की घबराहट बढ़ गई है। उन्हें प्रवक्ता पद से छुट्टी होने का डर साल रहा है।

 भाजपा की इस प्रवक्ता ब्रिगेड ने गुजरात चुनाव में वक्तृत्व शैली का प्रभाव छोड़ा है। निर्मला सीता रमण के पास कड़क आवाज के साथ ही फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने की कला भी है तो छोटे पर्दे से राजनीति में आई स्मृति ईरानी यानी 'तुलसी' के पास चुंबकीय आकर्षण है। टीवी न्यूज चेनल पर कितने ही अधकचरी एंकर प्रश्न पूछने के बारे में मर्यादा लांघते हैं तो 'मेडम वॉच योर वर्डस' कहने की ताकत मीनाक्षी लेखी में है। तीश्ता सितलवाड़ और शबनम हासमी जैसी हस्तियों को शब्दश: जवाब देने के लिए भाजपा ने महिला प्रवक्ताओं की एक 'फौज' ही खड़ी कर दी है। 


संघ का मानना क्या है? 


यह और बात है कि जनसंघ के काल में ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने उस काल में जनसंघ को स्थापित करने में अहम् भूमिका निभाई थी और वे लोकसभा और राज्यसभा में भी वर्षों तक रहीं। इसके बाद एनकी पुत्री वसंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री और यशोधरा राजे मप्र में मंत्री भी रहीं। 


निर्मला सीतारमण  


भाजपा में जिन महिला प्रवक्ताओं का उदय हो रहा है, उनमें निर्मला सीतारमण का नाम प्रमुख है। हैदराबाद के परकला प्रभाकर नामक राजनीतिक विश्लेषक के साथ उनका विवाह हुआ है। उनके पति किसी वक्त चिरंजीवी की प्रजा राज्यम् पार्टी में प्रवक्ता थे। यह पार्टी बाद में कांग्रेस में विलीन हो गई थी। 43 वर्षीय निर्मला एक पुत्री की माता हैं और तिरूचिनापल्ली की सीतालक्ष्मी कॉलेज से ग्रेजुएट हैं। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी से उन्होंने इंटरनेशनल स्टडीज में एमफिल किया है। 

उच्च अध्ययन के बाद उन्होंने लंदन की एक कंपनी में रिसर्च विभाग में नौकरी की थी। 

हालांकि, उल्लेखनीय बात यह है कि भाजपा में महिला प्रवक्ताओं का यह उदय आरएसएस की ​​अतिप्राचीन विचारधारा के विपरीत है। आरएसएस के संस्थापक डॉ. के.बी.हेडगेवार संघ की गतिविधियों में महिलाओं को अधिक महत्व देने को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं थे। 1936 में लक्ष्मी केलकर ने जो सुधारवादी थीं, उन्होंने आरएसएस में महिला विंग शुरू करने का विचार पेश किया था पर संघ प्रमुख ने उन्हें गंभीरता से न लेते हुए इतना ही कहा था कि ''तुम चाहती हो तो एक महिला सेल शुरू कर दो''उसके अनेक वर्षों बाद राष्ट्र सेविका समिति की शुरुआत हुई पर उसे भी परिवार की शर्तों पर ही काम करना था। संघ महिलाओं को 'मातृत्व' की जिम्मेदारी में व्यस्त रखने की विचारधारा रखता है परंतु बदलते समय के साथ भाजपा में सहज ही महिला शक्ति का उदय हुआ है। 

माथे पर बड़ी बिंदी वाली सुषमा स्वराज उसका एक बढ़िया उदाहरण है। स्त्री अब घर की चारदीवारी के बीच रहने वाली, काम करने वाली, बच्चों की परवरिश करने वाली और पति की सेवा में व्यस्त रहने वाली स्त्री नहीं। यह बात अब भाजपा की समझ में अच्छी तरह आ गई है कि उसकी प्रमुख विरोधी पार्टी कांग्रेस ने इंदिरा गांधी जैसी शक्तिशाली प्रधानमंत्री, प्रतिभा पाटील जैसी पूर्व राष्ट्रपति, सोनिया गांधी जैसी पार्टी अध्यक्ष, मीराकुमार जैसी लोकसभा अध्यक्ष औश्र शीला दीक्षित जैसी मुख्यमंत्री दी हैं। भाजपा इस मामले में संघ की पकड़ से बाहर आती दिख रही है।


मीनाक्षी लेखी


मीनाक्षी लेखी दिल्ली के प्रसिद्ध वकील और राजनीतिज्ञ प्राणनाथ लेखी के साथ ब्याही हैं। प्राणनाथ लेखी भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वे दिल्ली के हिंदू कॉलेज से स्नातक हैं। उन्होंने दिल्ली युनिवर्सिटी से विधि की डिग्री भी ली है। 1990 में उन्होंने दिल्ली हायकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रेक्टिस शुरू की थी। वे नेशनल कमीशन फॉर विमेन और तमाम एनजीओ के साथ जुड़ी हैं। 


स्मृति ईरानी


स्मृति ईरानी पंजाबी पिता और बंगाली मां की संतान है। उनके पिता का नाम अजय​कुमार मल्होत्रा और माता का नाम शिवानी बागची है। उनके पिता दिल्ली में एक कुरियर कंपनी चलाते थे। वे मुंबई के जुबीन ईरानी के साथ ब्याही हैं। 2003 में ''क्योंकि सास भी कभी बहू थी'' टीवी धारावाहिक में तुलसी विरानी की भूमिका के बाद मशहूर हो गईं थीं। उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली से कपिल सिब्बल से चुनाव लड़ी थी और हार गई थी। 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी पर तीखी टिप्पणी कर दी थी। बाद में मोदी की ताकत देखने के बाद वे मोदी की फैन बन गईं। 37 वर्षीय स्मृति ईरानी दो बच्चों की मां हैं। 


वाणी त्रिपाठी


वाणी त्रिपाठी वैसे तो उत्तराखंड से आती हैं पर उनकी परवरिश दिल्ली में हुई है। उनके माता—पिता दिल्ली विश्वविद्यालय में थे। 33 वर्षीय वाणी दिल्ली के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएट हैं। नेशनल स्कूल आफ ड्रामा से प्रशिक्षित हैं और इस क्षेत्र में शिक्षा भी दी है। इसके बाद वे नाटकों और फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई स्थायी हो गईं। 

सभी प्रवक्ताओं में निर्मला सीतारमण सर्वश्रेष्ठ कही जा सकती हैं। स्मृति ईरानी तो सास—बहू की तरह झगडऋती नजर आती है। उत्कृष्ट प्रवक्ता बनने के लिए राष्ट्रीय—अंतरराष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों पर गहरी पकड़ होना जरूरी है। प्रवक्ता को आक्रामक होना चाहिए पर ऐसा नहीं यौद्धा के माफिक लड़ने पर उतारू हो जाए। केमरे का डर नहीं होना चाहिए। भाजपा की इस महिला शक्ति के सामने कांग्रेस में जयंती नटराजन और रेणुका चौधरी है। कई लोग तो रेणुका चौधरी को महिला ही नहीं मानते।

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