शनिवार, 8 सितंबर 2012

शिवाकाशी के सुलगते सवाल

धूप छांव
शिवाकाशी यानी पटाखों-आतिशबाजी की वह नगरी, जिसका  जिक्र अमूमन हर दीपावली पर होता आया है, जब हम पटाखे खरीदते या फोड़ते हैं। इसके अलावा, शिवाकाशी का नाम तब सुर्खियों में होता है, जब वहां कोई अग्निकांड घटित होता है। पिछले हफ्ते मंगलवार को शिवाकाशी के मुधालीपेट्टी स्थित पटाखों के कारखानों हुए धमाकों के बाद लगी भीषण आग में 52 लोगों के प्राण-पखेरू उड़ गए, वहीं इतने ही जख्मी हो गए।

गुरुवार, 6 सितंबर 2012

फेरी वालों को मिलेगी दिलासा

धूप-छांव
बह की चाय पीने के बाद दूधवाले की हाक के पश्चात कानों पर आवाज गूंजती है सब्जी वाले की। केवल भाजी वाला ही नहीं तो जो चाहिए वह छोटी से छोटी वस्तु अपने ठेले पर या कंधे पर रखकर अपने घर के ठीक सामने उपलब्ध करा देने वाले भाजीवाले से लेकर फेरी वालों ने आम लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।

शनिवार, 25 अगस्त 2012

जात न पूछो साधु की..

धूप-छांव
महाकवि कबीरदास जी ने कहा है ‘जात, न पूछो साधु की।’ हम भी नहीं पूछेंगे, मगर भगवा वस्त्र धारण करने पर यह सवाल तो उठता है कि यह बाबा आखिर है क्या? जो नतीजे अण्ण हजारे न दे सके, वह काम बाबा रामदेव ने कर दिखाया। अण्णा हजारे पहले तो भीड़ इकट्ठा करने में विफल रहे।

बुधवार, 22 अगस्त 2012

जॉनी, तुम वाकई बहुत याद आते हो

अभिनेता राजकुमार को गुजरे 15 साल हो गए, परंतु लाखों-करोड़ों प्रशंसकों के दिलोदिमाग पर वे आज भी छाए हुए हैं। गत जुलाई में उनकी पुण्यतिथि थी। वे 3 जुलाई 1996 को दुनिया को गुड बॉय कर गए थे। इसके बाद के इतने वर्षो में अदाओं के शहंशाह का खिताब आज भी उनके नाम पर ही है। राजकुमार की संवाद शैली आज भी लोगों के कानों में गूंजती है। उनकी फिल्म ‘सौदागर’ का एक संवाद है-‘जॉनी..हम तुम्हें मारेंगे, और जरूर मारेंगे, पर बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हामरी होगी, और वक्त भी हमारा होगा।’

शनिवार, 18 अगस्त 2012

असम क्यों है ‘अ सम?’

केंद्रीय गृहमंत्री बनने के बाद सुशीलकुमार शिंदे को वाकई लग रहा होगा कि उन्होंने कांटों का ताज पहन लिया है। आतंकवाद, माओवाद जैसी चिरकाल से चली आ रही विहंग समस्याएं तो उन्हें निवृत्त गृहमंत्री चिदम्बरम विरासत में दे ही गए थे कि उनके गृहमंत्री बनते ही उत्तर-पूर्व में स्थित असम सुलग उठा। ठीक इसी बीच पुणो में हुए सीरियल बम ब्लास्ट ने नए गृहमंत्री का धमाकेदार इस्तकबाल किया।

शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

आखिर, कोमल कलियों पर कहर क्यों?

हरियाणा, यूं तो देश के तमाम छोटे राज्यों में से एक है पर वह सदैव सुर्खियों में रहता आया है. कभी भजनलाल तो कभी बंसीलाल तो कभी देवीलाल- हरियाणा के इन लालों ने हरि-भूमि को सदैव सुर्खियों में रखा है. संप्रति, फिजा उर्फ अनुराधा बाली की खुदकुशी मामले ने फिजां मं रंग घोला हुआ है. फिजा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की बहू थी. फिजा का शव उसके ही घर से बरामद किया गया है.

रोटी जरूरी है या मोबाईल?

देवी अहिल्या की नगरी इंदौर के राजबाड़ा स्थित एक चाय की टपरी पर बरसों पहले एक उम्दा शेर अंकित था। शेर था-‘जिस बात की बात नहीं होती, उस बात की बात होती है। उस बात की बात नहीं होती, जिस बात की बात होती है।’मुङो लगता है कि हमारी सरकारें और राजनीतिक दल भी अक्सर उन मुद्दों, समस्याओं पर बात नहीं करते, जिन मुद्दों या समस्याओं पर उन्हें न केवल गंभीरता से सोच-विचार, मंथन कर ठोस कदम उठाना चाहिए।

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

जिम्मेदारों को कौन बताए जिम्मेदारी

समूचा देश आज पानी-पानी है..अनेक स्थानों पर बाढ़ की स्थिति है..नदी-नाले लबालब है..अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं, जब देश पानी के लिए तरस रहा था..कोई मेंढक-मेंढकी का ब्याह रचा रहा था तो कोई जीते-जी अपनी अर्थी निकालकर जल के राजा इंद्र से मन्नत मांग रहा था..उसके भी पहले हमारे देश के कृषि मंत्री शरद पवार, तमाम मौसम वैज्ञानिकों, ज्योतिषियों-भविष्यवक्ताओं ने भविष्यवाणी की थी कि चिंता नहीं करें..देश में बहुत अच्छी बारिश होगी, लेकिन जब मानसून ने मुंह मोड़ लिया तो हमारे ये सभी महामहिम सूखे और अकाल का भूत दिखाने में जुट गए थे.

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

वाह आडवाणीजी! क्या खूब फरमाया

भारतीय जनता पार्टी यानी ‘पार्टी विद डिफरेंस.’ नहीं है तो भी उसे भाजपाई ही कर देते हैं. यह डिफरेंस, सुनें समङों तो केंद्र की कांग्रेसनीत मनमोहन सरकार पराभूत होगी, उसके बाद दिल्ली पर हमारा राज होगा, ऐसे दिवास्वपन देखने में भी भाजपाई ही आगे हैं. मात्र, इन सपनों को चुना लगाने का काम किसी और ने नहीं बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गत दिनों किया है.

सोमवार, 6 अगस्त 2012

मानेसर की हिंसा के सबक

हरियाणा के गुड़गांव से 16 किमी दूर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में पिछले दिनों हुए श्रमिकों के हिंसक आंदोलन की आग अभी बुझी नहीं है। इस औद्योगिक क्षेत्र में गत 18 जुलाई को दिन ढले मारुति सुजुकी कंपनी के श्रमिकों ने हिंसक रूप इख्तियार कर कंपनी के करीब 90 अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मारपीट की। इन हिसंक श्रमिकों के निशाने पर था अधिकारी वर्ग।

सोमवार, 30 जुलाई 2012

मीडिया के सिर ठीकरा

पत्रकार अपनी डय़ूटी यानि फर्ज अदा करते हैं, तब राजनेता उन्हें अपने स्वार्थ के लिए बदनाम करते हैं. किसी बात का ठीकरा फोड़ना हो तो पत्रकार सबसे कमजोर कड़ी होता है. पहले शान के साथ बोलना और बवाल मचने पर हाथ ऊंचे कर देना, या यह कह देना कि मैंने तो ऐसा कहा ही नहीं था. मेरे बयान या साक्षात्कार को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. आजकल यह मर्ज बहुत बढ़ गया है.

रविवार, 29 जुलाई 2012

खेल को खेल ही रहने दो..

ओलंपिक, यानी खेलों के ‘महाकुंभ’ का आगाज हो चुका है।  ओलंपिक, अब दूसरे खेलों की तरह खेल कम रह गया है और उनमें व्यावसायिकता हावी हो गई है। नतीजा यह हुआ है कि ओलंपिक स्पर्धाओं को अब समारोह-जलसे और जश्न का स्वरूप मिलने लगा है। कभी खेत-खलिहान में शुरू हुए प्राचीन ओलंपिक और आधुनिक ओलंपिक में यही सबसे बड़ा फर्क दिखाई पड़ता है। यह फर्क आने के दो प्रमुख कारण हैं।

ऐसा तो आपातकाल में भी नहीं हुआ!

कर्नाटक विधानसभा की विशेषाधिकार हनन समिति ने बेलगाम के मराठी दैनिक ‘तरुण भारत’ में प्रकाशित कुछ खबरों के आधार पर उसके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला चलाए जाने की सिफारिश की है. इसी तरह,‘तरुण भारत’ के संपादक किरण ठाकुर को 30 जुलाई को माफी मांगने का फरमान भी जारी किया है.

शनिवार, 21 जुलाई 2012

अफवाहों में सोशल मीडिया

मौजूदा संचार क्रांति के युग में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। फेसबुक, ट्विटर, यूटय़ूब सरीखी वेबसाईट्स अब केवल मनोरंजन के साधन ही नहीं रह गई हैं बल्कि जानकारी और खबर से लेकर रोजगार पाने तक के महत्वपूर्ण कामों का सशक्त माध्यम भी बन गई हैं। सिक्के के दूसरे पहलू को देखें तो इन्हीं माध्यमों से फैलने वाली अफवाहें संप्रति चिंता की एक बड़ी वजह है और उस चर्चा जरूरी हो गई है। हाल ही में भारत की दो हस्तियां इन सोशल मीडिया की शिकार हुई हैं।

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

राजेश खन्ना: दीवानगी का वह दौर अब नहीं आएगा

एकाधि फिल्म अभिनेता जब ढेर सारी लोकप्रियता पा लेता है, तब वह केवल पर्दे तक ही सीमित नहीं रहता..पर्दे से बाहर भी उसकी भूमिका समाज का एक भाग बनती है..वह कलाकार विशिष्ट सामूहिक भाव-भावनाओं, सपनों का प्रतीक बन जाता है..सत्तर के दशक में राजेश खन्ना को भी निर्विवाद रुप से यह सम्मान मिला था और इसीलिए जब ‘काका’के निधन की दुखद खबर आई तो एक पीढ़ी को ऐसा कि उनके जीवन का एक भाग कोई चुरा ले गया..

बुधवार, 18 जुलाई 2012

बाबू मोशाय, अब ‘आनंद’ कहां?

मुंबई। ‘बाबू मोशाय, जिंदगी और मौत ऊपरवाले के हाथ हैं जहांपनाह..जिसे ना तो आप बदल सकते हैं ना मैं..हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जिसकी डोर उपरवाले की ऊंगलियों में बंधी हैं..कब कौन कैसे उठेगा कोई नहीं बता सकता..’

मंगलवार, 17 जुलाई 2012

राहुल की ताजपोशी की तैयारी!

‘राहुल गांधी पार्टी अथवा राजनीति में तेजी से आगे बढ़ते, तो शायद उन्हें मीडिया की प्रतिक्रिया से रूबरू होना पड़ता, पर अब उन्हें नेत़त्व स्वीकार करने के लिए आगे आना चाहिए, यह मांग पार्टी में उठने लगी है. राहुल गांधी के सक्रिय होने का वक्त आ गया है.’ कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह ने अपनी ये भावनाएं एक चेनल पर व्यक्त कीं. ये भावनाएं उनकी अकेले की न होकर कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं की भी है.

शनिवार, 14 जुलाई 2012

लैला की हत्या के पीछे के रहस्य

पाकिस्तानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान और उसके परिवार की हत्या के रहस्य पर से आखिर कब पर्दा उठेगा, कोई नहीं जानता, पर उसकी हत्या का रहस्य एक सामान्य अपराध का विषय न होकर गंभीर और चिंताजनक है। क्योंकि लैला खान पाकिस्तानी नागरिक थी। उसके जेहादियों से संबंध के बारे में भी शंका थी और इतने महीनों से उसके लापता होने पर भी पुलिस ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया था।

शनिवार, 7 जुलाई 2012

अबू पकड़ा तो गया, अब आगे क्या?

एक व्यक्ति को एक दिन जादुई चिराग मिला। उसने जादुई चिराग को उठाया और उस पर हाथ मारा। इतना पढ़कर आप सोचेंगे, अब कोई जिन्न-विन्न निकलेगा, पर न जिन्न निकला, न विन्न। चिराग पर हाथ मारते ही एक जोरदार धमाका हुआ और उस धमाके में 10 मारे गए, 20 जख्मी हो गए। सबक: जादुई चिराग का जमाना कब से गया। अब किसी भी लावारिस वस्तु को हाथ न लगाएं। कितनी ही वस्तुएं ‘अलाउद्दीन’ की नहीं, मुजाहिद्दीन की भी हो सकती हैं. मुंबई की लोकल ट्रेनों में oंृखलाबद्ध बम विस्फोट होने के बाद यह एसएमएस धड़ाधड़ एक-दूसरे को भेजे गए थे। यह मेसेज पढ़कर लोग भले ही एकबारगी हंसें हों पर ऐसे बम धमाकों का मंजर जरूर उनके जेहन में आया होगा। बम धमाके की वह घटना अनायास तारी हो जाती है और आदमी सोचने को मजबूर हो जाता है कि आखिर, देश में यह सब कब तक चलता रहेगा?

गुरुवार, 5 जुलाई 2012

विधायकों को कार! शासकीय धन की लूटमार!!

उत्तरप्रदेश, देश का एक ऐसा राज्य है जहां शासकीय आदेश, कायदे-कानून की कोई ग्यारंटी नहीं ले सकता। पहले मायावती सरकार ने करोड़ों रुपए की शासकीय निधि पानी में बहाते हुए प्रतिमाएं और स्मारक तान दिए, उन पर आज भी उलटी-सीधी चर्चा जारी है तो अभी-अभी सरकार में आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने उत्तरप्रदेश के विधायकों को उनकी विधायक निधि से बीस लाख रुपए तक की कार देने का अजीबोगरीब निर्णय लिया है.

बुधवार, 4 जुलाई 2012

ब्लेक पर सबकी निगाहें!

कैरेबियाई द्वीप समूह का एक टापू है जमैका..दूसरे टापुओं के मुकाबले थोड़ा बड़ा..पॉप सिंगर बॉब मार्ली के कारण जमैका का नाम दुनिया भर में रौशन हुआ. उसके अलावा तमाम क्रिकेट खिलाड़ी भी इस टापू से निकले. हाल ही में इसी जमैका से हवा से स्पर्धा करने वाले धावक भी निकले..असाफा पावेल, उसेन बोल्ट जैसे पुरुष धावकों के साथ रास्तों पर दौड़कर छोटी से बड़ी हुई ओलिम्पिक में स्वर्णपदक विजेता शैली एन फ्रेजर का नाम लिया जा सकता है..अब इसी जमैका से योहान ब्लेक नामक धावक उदित हो रहा है..

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

कौन बनेगा ‘खेल-रत्न

लंदन ओलिम्पिक में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सबकी नजरें लगी हुई हैं. लंदन ओलिम्पिक के समापन के बाद ही क्रीड़ा जगत का अति प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘राजीव गांधी खेल रत्न}’ दिया जाना है. 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस पर  दिए जाने वाले इस पुरस्कार के लिए छह खिलाड़ियों को नामांकित किया गया है, जिनमें से पांच खिलाड़ी लंदन ओलिम्पिक में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर पदक जीतने के साथ-साथ ‘खेल-रत्न}’ के लिए भी जोर-आजमाईश करेंगे. इस बार ‘राजीव गांधी खेल रत्न}’ पुरस्कार के लिए  जिन छह खिलाड़ियों को नामांकित किया गया है,

ओलिम्पिक और भारत: लंदन से क्या लाओगे सांबा

अब तमाम खेलप्रेमियों का ध्यान लंदन में शुरु होने वाले ओलिम्पिक का!आगामी 27 जुलाई से ओलिम्पिक शुरु होंगे..इस ओलिम्पिक में, अपेक्षा है कि भारतीय खिलाड़ी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर कुछ पदक भारत की झोली में डालेंगे, क्योंकि अब तक का इतिहास बड़ा दुखद और अफसोसनाक रहा है..हमारे खिलाड़ी बिना कोई पदक लिए ही वतन लौटे हैं..इसलिए हमारे धुरंधर और जांबाज खिलाड़ियों से पदक की अपेक्षा लाजिमी भी है..

सोमवार, 2 जुलाई 2012

आखिर, कैसे बचे माहियां ?

गुड़गांव के नजदीक मनेसर में 70 फीट गहरे बोरवेल में गिरी 4 साल की अबोध बच्ची माही को पूरे 88 घंटों के बाद बाहर निकालने में प्रशासन को कामयाबी तो मिली, लेकिन नियती के आगे किसी की नहीं चलती, इस बात का एहसास एक बार फिर हो गया। डाक्टरों द्वारा माही को मृत घोषित करते ही उसके माता-पिता विलाप करने लगे। कुछ घंटों पहले ही माही का पांचवां जन्मदिन मनाया गया था. उसी दिन रात को बच्चों के साथ खेलते वक्त माही 70 फीट गहरे बोरवेल के खड्डे में गिर गई। उसे बाहर निकालने के लिए सेना, अगिAशमन, पुलिस और मेट्रो के जवानों ने अथक मेहनत की पर तब तक माही दम तोड़ चुकी थी।

शुक्रवार, 29 जून 2012

आदिवासी आश्रमों से निकलते हैं गुंडे!

आदिवासी आश्रम शालाओं में पढ़ने वाले सभी गुंडे होते हैं. उनमें से कितने आयपीएस, आयएएस अधिकारी निकले हैं? यह सीधा-सपाट महाराष्ट्र के जलआपूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री लक्ष्मणराव ढोबले ने केबिनेट की बैठक में कर खलबली मचा दी है। ढोबले का यह बयान चिंताजनक है. राज्य के एक जिम्मेदार मंत्री का यह बयान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने से अधिक वह सामाजिक दृष्टि से भी गंभीर है. यदि यह बयान किसी विरोधी पार्टी ने किया होता तो उसे राजनीतिक विरोध माना जा सकता था, मगर यहां तो सत्तारूढ़ मंत्रियों ने आदिवासी विकास मंत्री पर टीका कर बबनराव पाचपुते पर सवालिया निशान लगा दिया है. 
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